चीनी सेना ने फिर की घुसपैठ की खबर
दिखा-सुनाकर न्यूज चैनलों ने युद्ध का उन्माद सा खड़ा कर दिया। न्यूज चैनलों को
देखकर एकबार को तो ऐसा लगा कि मानो बस आर-पार की स्थिति हो गई है।अब तो शमशीरें
निकालने भर की देरी है। काफी देर तक घुसपैठ की खबरे सुन-सुनकर दिमाग झनझनाया तो
टीवी बंद कर दी। थोड़ा सुकून मिला तो सोचा चलो फेसबुक से मुखातिब हो लिया जाए।
फेसबुक खोलते ही पहला पोस्ट पढ़ने को मिला... हां, हम युद्ध के लिए तैयार हैं तो दूसरे
पोस्ट में लिखा था कि ड्रैगन दिल्ली पहुंचने की तैयारी में और देश आईपीएल देखने
में व्यस्त है। तीसरा पोस्ट तो रिपोतार्ज सा लगा। लिखा था ...वाकई आज कहीं
चीख-पुकार नहीं है। हम आजाद है लेकिन हर तरफ ख़ामोशी है...सन्नाटा है...वीराना
है...जो शायद इशारा कर रहा है आने वाले तूफ़ान का! यहां एक आदमी (सरबजीत) की मौत पर
हल्ला मचा रहे हैं और वहां हजारों माताओं की कोख सूनी होगी...। चीनी सेना के कृत्य
से जुड़े करीब सात-आठ पोस्ट नजरों से होकर गुजर गए। लगा जैसे युद्ध भड़काने का काम
चीनी कम अपने ज्यादा कर रहे हैं। टिप्पणियां ऐसी जैसे सुरक्षा सलाहकार के पद पर
आसीन हों। सालों से भारत-चीन संबंधों पर उनकी पैनी नजर रही है।
अरे... हिंदुस्तानियों को मेहमान नवाजी की महान परंपरा विरासत में
मिली है। मेहमान को भगवान का दर्जा दिया जाता है। ये हमारे पर्यटन विभाग की
उपलब्धि ही तो है जो चीनी सेना तंबू गाड़े इंतजार कर रही है कि कब आमिर खान आकर
कहेंगे अतिथि देवो भवः। ये और बात है कि बाल्यकाल से ही हमें वे मेहमान सदा प्रिय
रहे जो आते समय चॉकलेट लाते थे और जाते समय घर वालों के मना करने पर भी दो-पांच
रुपए हाथ में थमा जाते थे। ऐसी परिस्थिति में घर वालों के लिए वो देवता रहे हो या
नहीं हमारे लिए तो तुल्य थे। बस यहीं पर ये चीनी मात खा गए... न तो ये चॉकलेट ले
कर आए और न ही इनकी हालत दो-पांच रुपए थमाने भर की दिख रही है। ऐसे हालातों में
माओ को दूर से ही राम-राम।
