अबे ज़ाहिल! तू काहे चिल्लाए जा रहा है बे। सरकार तेरी सुरक्षा को लेकर मरी जा रही है, करोड़ो रूपये पानी की तरह तेरी सुरक्षा को बहा रही है और एक तू है कि ज़रा सा धमाका हुआ नहीं कि लगा चिल्लाने। देर-सवेर तो होती ही रहती है पर सरकार चिन्तित है तेरी सुरक्षा के लिए। नालायक, फिर क्यों चिल्ला रहा है।
अरे चिल्लाना तो बाबा रामदेव और अन्ना ब्रिगेड को चाहिए। अच्छी खासी मेहनत पर इस आतंकी धमाके ने विस्फोट कर दिया। मुआ! सारी कवरेज बटोर ले गया। बाबा की तो महीने भर की कवायद धरी की धरी रह गयी। जान की बाजी लगायी, पुलिसिया डण्डों का सामना किया पर एक धमाके ने सारा खेल बिगाड़ दिया। पर तुझे क्या? तू तो बस लगा चिल्लाने। देख तेरी चिल्ल-पो ने राजनैतिक पार्टियों में कैसी हलचल पैदा कर दी? बयानबाज़ी की झड़ी सी लग गई। तेरी सुरक्षा को लेकर पार्टियां बेचैन हो उठी। अपने दूसरे बाबा (राहुल बाबा) तेरी सुरक्षा को लेकर परेशान हो उठे हैं। बेचारे कितने चिन्तित हैं, पर क्या करें, साला! एक प्रतिशत जो भारी पड़ रहा है उन पर, वर्ना 99 प्रतिशत तो तू सुरक्षित है ही। फिर क्यों शोर मचा रहा है? तू क्या चाहता है, तेरी सुरक्षा के लिए वे एस.पी.जी. लगवा दे। तेरी सुरक्षा का स्तर कितना ऊँचा है यह दिग्विजय सिंह से पूछ। अबे! यहां तू पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा महफूस है तभी तो तू अभी तक जिंदा है। देख, तेरे जीवित रहने का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। आखिरकार पाकिस्तान के मुकाबले भारत में विस्फोट का रिकार्ड जो इन्होंने अच्छा बना रखा है। कम से कम उसका शुक्रिया तो अदा कर ज़ाहिल। लेकिन तू तब भी चिल्ला रहा है। छाती पीट रहा है। पर सुन, तेरी ही आस्तीन में सांप हैं। तेरे ही बन्धु इसके जिम्मेवार हैं। अरे भोले! राज ठाकरे ने कितना समझाया कि इन उत्तर भारतीयों से दूर रह, पर तू है कि मानता ही नहीं। अब भी समय है संभल जा। राज ठाकरे की न सही तो दिग्गी राजा की ही सुन ले। यही मान ले कि इन धमाको के पीछे हिन्दू संगठनों का हाथ है। तू मानता क्यों नहीं कि ये धमाका तेरे अपनो की ही देन है। यह तेरी ही गलती का दुष्परिणाम है और तू दूसरों पर चिल्ला-चिल्लाकर दोषारोपण कर रहा है। अरे! कम से कम धर्मनिरपेक्ष पुरोधा की तो सुन ले।
मूर्ख, सरकार को कोस रहा है। बड़े जतन से तो सरकार बनायी है। वोट देने के समय तो बड़ा इतरा रहा था, होशियारी दिखा रहा था। तेरी होशियारी की ही देन है कि एक पार्टी की सरकार नहीं बन सकी। अब गठबंधन सरकार की अपनी कुछ मजबूरियां होती हैं। उन मजबूरियों का भुगतान कौन करेगा? मंत्री सरकार की सुरक्षा के लिए गठबंधन धर्म निभाएं कि तेरी सुरक्षा को दौड़े। अरे गधे! यह तो समझ, तेरी सुरक्षा की जवाबदेही मंत्री या मंत्रालय की नहीं गठबंधन में निहित पार्टियों की होती है। मैं पूछता हूं कि उचित-अनुचित, सुरक्षा-असुरक्षा का सवाल करने वाला तू कौन होता है? तू यह क्यों भूल रहा है कि तू चुनाव में अपना प्रतिनिधि चुन चुका है। फिर क्यों अपनी टांग अड़ा रहा है? अब बंद कर चिल्लाना। जाने ज़ाहिल कब समझेगा तू?
तेरी आए दिन की चिल्ल-पो ने राजनैतिक पार्टियों के भोपू चालू कर दिए। बयानों की ऐसी बयार चल पड़ी है कि अब तेरी आवाज ही दब सी गयी है। तेरी चिल्ल-पो से बड़ी चिल्ल-पो शुरू हो चुकी है। तो बेटा, अब तेरी चिल्ल-पो किसी काम की नहीं रही। सुन, नक्कारे में तूती नहीं बजायी जाती। अब चिल्लाता रह।